सहरसा, मार्च 9 -- सहरसा। रविवार को गायत्री शक्तिपीठ में व्यक्तित्व परिष्कार सत्र को संबोधित करते हुए डाक्टर अरुणकुमार जायसवाल ने मातृत्व दिवस के संबंध में कहा प्रेम किसी के मन में हो सकता है लेकिन मातृत्व जो है वह विरले के मन में होता है। मां बनना तो एक जैविक घटना है पर मातृत्व का होना एक दैवी घटना है। प्रेम और मातृत्व में बहुत फर्क है। कहा कि नारी का प्रेम जब पूर्ण होता है तो वह पत्नी की जगह माता बन जाती है। पत्नी का पति के प्रति जब संतान भाव आता है तब समझिए कि पत्नी का प्रेम पति के प्रति पूर्ण हो गया। परिवार में, समाज में सुव्यवस्था नियमों से ही नहीं आती है, प्रेम और ईमानदारी से आती है। प्रेम और ईमानदारी के लिए कोई नियम की आवश्यकता नहीं है वह तो स्वतःस्फूर्त होता है। जब नारी के अंदर मातृभाव आ जाता है तो उसे अपनी पति की गलती दिखाई नहीं ...
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