हाथरस, जून 7 -- हाथरस। पुरुषोत्तम मास में शहर के नवीपुर कला स्थित शिव कालोनी मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा में कथा व्यास शिवकृष्ण शास्त्री के द्वारा सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, प्रहलाद चरित्र, अजामल चरित्र, बामन भगवान की लीला का वर्णन किया।उन्होंने कि यज्ञ समाज को जोड़ने के लिए होता है। राजा दक्ष ने भगवान शंकर अपमान करने के लिए किया था। इसलिए राजा दक्ष का कनखल में यज्ञ संपन्न नहीं हुआ। माता सती यज्ञ में अपने प्राण न्यौछावर किए। उन्होंने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि माता ही संस्कार की प्रथम पाठशाला होती है। मां ने ध्रुव को सब कुछ सिखया था। यह भी पढ़ें- भंडारे के साथ भागवत कथा का समापन इसके अलावा भगवान वामन की झांकी निकाली गई। वामन भगवान ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। उसमें दो पग में पूरा संसार नाप दिया। वामन भगवान की झांकी का...