नई दिल्ली, अक्टूबर 19 -- जब इरादे बुलंद हों और अपनों का अटूट विश्वास साथ हो, तो जिंदगी की सबसे बड़ी कठिनाई भी आपकी सफलता की राह नहीं रोक सकती। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है, लेकिन आईएएस अधिकारी दीपांशु का सफर यह साबित करता है कि इंसान अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी मुसीबत को हरा सकता है। कम उम्र में ही माता-पिता के साये को खो देने के बाद जिस तरह से दीपांशु ने दुखों से उबरकर यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल की, वह देश भर के लाखों छात्रों और युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में ऑल इंडिया 38वीं रैंक (AIR 38) हासिल कर आईएएस (IAS) बनने का सपना पूरा किया।माता-पिता के निधन से टूटा दुखों का पहाड़ दीपांशु जिंदल का शुरुआती जीवन पढ़ा...