माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म : धीरेंद्राचार्य
हमीरपुर, अगस्त 8 -- मुस्करा, संवाददाता। नवीन गल्ला मंडी परिसर में श्रावण मास में चल रही शिव महापुराण कथा के नौंवें दिन चित्रकूट धाम से आए अनंत श्री विभूषित हनुमत पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री धीरेंद्राचार्य महाराज ने श्रद्धालुओं को पुत्र धर्म और माता-पिता की सेवा का महत्व बताया। कथा के दौरान महाराज ने कहा कि भगवान राम ने अपनी सौतेली माता कैकेयी की आज्ञा का पालन करते हुए अयोध्या का राज सिंहासन त्यागकर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। इसी मर्यादा और माता-पिता की आज्ञा के पालन के कारण वह मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। उन्होंने भगवान गणेश का उदाहरण देते हुए कहा कि माता-पिता को सर्वोच्च मानकर उनकी परिक्रमा करने के कारण ही गणेश जी देवताओं में प्रथम पूज्य हुए। यह भी पढ़ें- धर्म-अधर्म की पहचान कर्मों से होती है, जाति से नहींमाता-पिता की ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.