मेरठ, अप्रैल 6 -- बुद्धा गार्डन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित शिव कथा में कथाव्यास डा. सर्वेश्वर ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का वर्णन किया। बताया कि माता पार्वती जीवात्मा का प्रतीक हैं, जबकि भगवान शिव साक्षात् परब्रह्म परमेश्वर के स्वरूप हैं। कहा कि हिमालयराज द्वारा पुत्री के विवाह के उपलक्ष्य में असंख्य गायों का दान किया जाना भारतीय संस्कृति में गोदान की महत्ता को दर्शाता है। गो दान को सर्वोत्तम दान बताते हुए उन्होंने देसी गोवंश के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया।संस्थान द्वारा संचालित कामधेनु प्रकल्प के माध्यम से देशभर में विभिन्न गोशालाओं का निर्माण कर साहीवाल, थारपारकर, गिर, कांकरेज, राठी आदि देसी नस्लों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति में गौ माता के गौरव को पुन स...