गोंडा, मार्च 22 -- खरगूपुर ,संवाददाता। भटपी के बाबा पुरवा में आयोजित शतचंडी महायज्ञ व श्रीराम कथा में देवी ऋषिता ने भक्तों को शनिवार देर शाम माता पार्वती के प्राकट्य की कथा का रसपान कराया। उन्होंने कहा कि पार्वती देवी, सती का पुनर्जन्म हैं, जो हिमालयराज हिमवान और रानी मैना की पुत्री के रूप में अवतरित हुईं। उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। पार्वती का अर्थ है ''पर्वत की पुत्री''। इन्हें शैलजा, गिरिजा कुमारी और उमा के नाम से भी जाना जाता है। राजा दक्ष के यज्ञ में पति का अपमान होने पर सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए थे, जिसके बाद वे शिव के वियोग में सती के शव के इक्यावन भाग होकर शक्तिपीठ बने। हिमालयराज के घर जन्मी पार्वती ने पूर्वजन्म की तरह ही महादेव को पुनः पति रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या का मार्...