जमशेदपुर, दिसम्बर 28 -- ऋषि अत्रेय की पत्नी माता अनसुइया ने माता सीता को पवित्रता धर्म की शिक्षा दी थी और बताया था कि पति को छोड़कर पर पुरुष का मुख नहीं देखना उत्तम है। श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन जमुना किनारे हरियाणा से आए आचार्य रविकांत वत्स ने अरण्य कांड और किष्किंधा कांड का वर्णन करते हुए शनिवार शाम यह कथा सुनाई। सोनारी के कैलाश नगर स्थित गीता भवन में आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आचार्य रविकांत वत्स ने बताया कि भगवान राम जब चित्रकूट छोड़कर अत्रेय ऋषि के आश्रम पहुंचे, तब माता अनसुइया ने सीता को उपदेश देते हुए कहा कि पर पुरुष को हमेशा भाई, पिता या पुत्र के समान देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि जो स्त्री भयवश पवित्रता का पालन करती है और अवसर मिलते ही अन्य पुरुष से रति करती है, उसे निम्न नारी कहा गया है। इस...
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