माता,-पिता व गुरु की सेवा करने वाला करता है उन्नति : भाव भूषण
मेरठ, मई 22 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के दूसरे दिन सर्वप्रथम मुख्य वेदी पर अभिषेक के पश्चात त्रिमूर्ति जिनालय में भगवान का अभिषेक व शांतिधारा की गई। विधान के दूसरे दिन 130 परिवारों की ओर से विधान किया गया। भगवान की शांतिधारा सरोज जैन, कपिन जैन, अन्मय जैन, आगम जैन आदि ने की। धर्म सभा में मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि माता-पिता चार पुत्रों की जन्म से ही सेवा करता है लेकिन चार पुत्र एक माता-पिता की सेवा नहीं कर सकते। जो भी माता-पिता व गुरु की सेवा करता है, उसको ऊंचाइयों पर जाने एवं उन्नति करने से कोई रोक नहीं सकता। माता-पिता एवं गुरु की सेवा को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। माता पिता व गुरु की सेवा से समाज में प्रतिष्ठा और श्रेष्ठ बनाये रखता है। सांयकाल में भगवान की आरती की गई। जिसमें सैकड़ों ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.