सिद्धार्थ, दिसम्बर 15 -- बांसी, हिन्दुस्तान संवाद। बांसी के माघ मेला मैदान प्रशासन की लापरवाही से दिन प्रतिदिन अवैध कब्जा के आगोश में आता चला जा रहा है। अगर यही खामोशी रही तो आने वाले दिनों में माघ मेला मैदान का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। अतिक्रमण का आलम यह है कि रानी मोह भक्त लक्ष्मी स्नान घाट के प्रवेश द्वार पर भी अवैध कब्जा बढ़ता जा रहा है। स्व. पंडित राजेंद्र नाथ त्रिपाठी के अथक प्रयास से वर्ष 1952 में जिलाधिकारी बस्ती और नियोजन विभाग के सहयोग से माघ मेला योग प्रदर्शनी के नाम से जमीन आवंटित कराई गई। जहां प्रतिवर्ष माघ मौनी अमावस्या के पर्व पर डेढ़ माह तक माघ मेला एवं प्रदर्शनी का आयोजन होता है। प्रशासन की लापरवाही से धीरे-धीरे माघ मेला मैदान के किनारे लोगों ने घर बनवाना शुरू किया और माघ मेला की जमीन पर भी अवैध कब्जा करके पांव पसारते...
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