मां सीता धैर्य, त्याग और आत्मसम्मान की प्रतीक
सीतामढ़ी, अगस्त 24 -- सीतामढ़ी। मां जानकी की पावन प्राकट्यभूमि सीतामढ़ी के सुहई (प्रेमनगर) स्थित श्रीरामजानकी मठ में रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 'श्रीजानकी कथा' रविवार को श्रद्धापूर्वक संपन्न हो गई। कथा के अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया। 12 वर्षीय बाल व्यास वैदेहीनंदन पंडित वेदांतजी ने कथा के माध्यम से मां जानकी के जीवन, व्यक्तित्व और आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मां सीता भारतीय संस्कृति में नारी गरिमा, आत्मबल, धैर्य, त्याग और आत्मसम्मान की प्रतीक हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति को अपने मूल्यों और आत्मविश्वास को नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मां जानकी का चरित्र केवल आदर्श पत्नी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह साहस, करुण...
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