रांची, सितम्बर 1 -- पहले मां का साया उठा और छह महीने बाद पिता भी हमेशा के लिए छोड़ गए। देखते ही देखते तीन छोटे बच्चे अनाथ हो गए। न मां रही, न पिता और न ही दादा-दादी या नाना-नानी का सहारा। पांच साल तक ये बच्चे दूसरों की मदद से किसी तरह जिंदगी आगे बढ़ाते रहे। ऐसे में झारखंड हाईकोर्ट का एक आदेश उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने 15 वर्षीय तनुस कुमार के भविष्य को सुरक्षित करते हुए सेंट्रल कोल फील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) को उसका नाम लाइव रोस्टर में शामिल करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि बालिग होने के बाद तनुस अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने का हकदार होगा। अदालत ने उसकी बड़ी बहन अवंतिका कुमारी को भी नियमानुसार मौद्रिक मुआवजा देने का निर्देश सीसीएल को दिया है। यह भुगतान आठ सप्ताह के भीतर करना होगा।छह महीने मे...