वाराणसी, मार्च 5 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। चौसट्ठी देवी के चरणों में गुलाल चढ़ाए बगैर काशी में रंगोत्सव की पूर्णता ही नहीं मानी जाती है। काशीवासियों ने सदियों से चली आ रही परंपरा होली पर बुधवार को निभाई। दिनभर रंग खेलने के बाद शाम में काशीवासी मुट्ठीभर अबीर-गुलाल मां चौसठ्ठी देवी के चरणों में अर्पित करके तंत्र की देवी से मुक्ति की कामना की। बनारसी फगुआ के तार काशीपुराधिपति से जुड़े हैं। बाबा विश्वनाथ के गौने पर काशीवासी बाबा और मां गौरा को गुलाल अर्पित करके होली के हुड़दंग की अनुमति लेते हैं। पांच शताब्दियों से अधिक समय से काशीवासी रंग-फाग के बाद मां चौसठ्ठी देवी को गुलाल अर्पित करके धूलिवंदन के साथ ही दरबार को जगाते हैं। बुधवार को परंपरा का निर्वहन करते हुए दशाश्वमेध घाट के पास स्थित माता का मंदिर होली की शाम को गुलाल-अबीर के रंग में ...