प्रयागराज, सितम्बर 14 -- प्रयागराज विधि संवाददाता जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को लगी लोक अदालत ने यह साबित कर दिया कि अगर दिलों में सुलह की चाहत हो तो वर्षों पुराने विवाद भी कुछ घंटों में मिट सकते हैं। पारिवारिक न्यायालय के सामने पेश हुए दो अलग-अलग मामले इस बात के गवाह बने, जिनमें अदालत का माहौल केवल कानूनी कार्यवाही का नहीं, बल्कि रिश्तों को जोड़ने वाला बन गया। भरण-पोषण विवाद का हुआ समाधान पहला मामला एक ऐसी पत्नी का था, जो कई वर्षों से अपने और बच्चों के भरण-पोषण के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटा रही थी। जब मुकदमा दाखिल हुआ था तब पति की आमदनी अपेक्षाकृत कम थी और अदालत द्वारा तय की गई राशि उस समय पर्याप्त मानी गई थी। मगर समय के साथ महंगाई तेज़ी से बढ़ी और पति की आय भी कई गुना बढ़ गई। पत्नी का तर्क था कि बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोज़म...
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