प्रयागराज, मई 10 -- प्रयागराज। ईश्वर शरण शुक्ल मां शब्द में ही पूरी कायनात का प्रेम और सुख समाया है। मां का हर दिन अपनी संतान के लिए एक उपहार सा होता है। मां का प्रेम नि:स्वार्थ और असीम होता है। आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर उन एहसानों को भूल जाते हैं, जो मां ने हमारे लिए करती हैं। लेकिन शहर में ऐसे बेटे-बेटियां हैं, जिन्होंने मां की सेवा के लिए त्याग व समर्पण की एक लंबी रेखा खींची है। मां की सेवा के लिए उन्होंने खुद का फ्रिक नहीं किया। मां के प्रति जिम्मेदारियों के कारण शादी तक नहीं की। विदेश में शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद मां की सेवा के लिए घर नहीं छोड़ा। मां ने अंतिम सांस ली तो बेटी ने अर्थी को कंधा दिया और पारंपरिक रूप से अंतेष्टि भी की। मां के प्रति कृतज्ञता और प्रेम व्यक्त करने के लिए रविवार को 'मां के प्रति आभार, स्वास्...
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