मुजफ्फर नगर, अगस्त 8 -- छपार। मातृ देवो भव: के संस्कार वर्तमान में भी जीवंत हैं। पिता के जाने के बाद बुजुर्ग मां की तीर्थ यात्रा की अधूरी इच्छा को पूरा करने के लिए बेटे ने फिर श्रवण कुमार की भांति कांवड़ उठाई है। कांवड़ यात्रा में पालकी एक ओर मां बैठी हैं, तो दूसरी तरफ संतुलन बनाने के लिए उनके वजन के बराबर 41 लीटर गंगाजल भरा गया है। श्रद्धा, समर्पण और अटूट भक्ति के इस अद्भुत दृश्य को जो भी देख रहा है, नतमस्तक हो रहा है। शामली जनपद के गांव बनत निवासी प्रविन्द्र कashyap के पिता स्वर्गीय कलीराम कश्यप के निधन के बाद उनकी माता सीता देवी ने तीर्थ यात्रा और कांवड़ लाने की इच्छा जताई। बढ़ती उम्र और शारीरिक असमर्थता के चलते मां के लिए पैदल चलना नामुमकिन था, लेकिन बेटे प्रविन्द्र के संकल्प के आगे यह बाधा भी बौनी साबित हुई। यह भी पढ़ें- पति के लीवर क...