नई दिल्ली, जून 22 -- हिंदू ज्योतिष में विवाह से पहले कुंडली मिलान का विशेष महत्व होता है। अक्सर लोग मांगलिक दोष सुनकर चिंतित हो जाते हैं, लेकिन कई बार इससे कहीं ज्यादा गंभीर 'वैधव्य योग' कुंडली में मौजूद होता है। वैधव्य योग जीवनसाथी के स्वास्थ्य, रिश्ते की स्थिरता या यहां तक कि जीवन की समाप्ति तक का संकेत दे सकता है। मांगलिक दोष मुख्य रूप से स्वभाव और वैचारिक मतभेद पैदा करता है, जबकि वैधव्य योग सीधे जीवनसाथी के अस्तित्व पर प्रभाव डालता है। आइए पंडित नरेंद्र उपाध्याय जी से जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।मांगलिक दोष और वैधव्य योग में अंतर मांगलिक दोष तब बनता है, जब मंगल लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हो। लेकिन अकेला मंगल बहुत कम ही घातक होता है। वैधव्य योग तब बनता है, जब मंगल किसी क्रूर ग्रह (शनि, राहु, केतु) के स...