रांची, अगस्त 21 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के प्रयास से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी महिला के साथ केवल मारपीट या धक्का-मुक्की करना अपने-आप में दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं माना जा सकता। इसके लिए आरोपी की ओर से दुष्कर्म करने की दिशा में कोई स्पष्ट और ठोस कृत्य होना जरूरी है। जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने शंकर राम के आरोपी की दोषसिद्धि को बदल दिया। अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा के तहत दुष्कर्म के प्रयास के बजाय धारा 354 के तहत महिला की गरिमा भंग करने के अपराध का दोषी माना। मामला पलामू के वर्ष 2005 का है। अभियोजन के अनुसार, महिला खेत में चारा काट रही थी। इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचा और उसे जमीन पर गिरा दिया। महिला किसी तरह वहां से भागी, लेकिन आरोपी ने दोब...