कानपुर, अगस्त 7 -- आशीष दीक्षित, कानपुर। अक्सर विवादों में रहने वाले उर्सला के डॉक्टरों का एक और हैरान करने वाला कारनामा सामने आया है। इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) ने महिला बंदी को 35 दिनों तक प्राइवेट रूम में भर्ती रखा, लेकिन इसकी जानकारी न तो अस्पताल की निदेशक को दी और न ही प्रबंधन को। इतना ही नहीं, इस दौरान महिला बंदी का किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज भी नहीं कराया। पूरा मामला तब सामने आया, जब जेल अधीक्षक ने महिला के स्वास्थ्य की जानकारी मांगते हुए और स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज करने के लिए अस्पताल को पत्र भेजा। वहीं महिला बंदी की सूचना छिपाने और विशेषज्ञ से इलाज नहीं कराने को निदेशक ने बड़ी लापरवाही माना। ईएमओ से स्पष्टीकरण मांगते हुए जांच शुरू करा दी है। यह भी पढ़ें- लव मैरिज कर बेटी हिंदू बनी, मुस्लिम धर्म में वापसी को पड़ोसी का परिवार...