महिलाओं को मोहरा बनाती राजनीति
नई दिल्ली, अगस्त 20 -- तुलसी जयकुमार,प्रोफेसर, एसपीजेआईएमआर मौजूदा राजनीति में, जब विरोधी असल मुद्दों पर जीत नहीं पाते, तो वे एक पुरानी और घिनौनी चाल का सहारा लेते हैं। वे 'विरोधियों' की नजदीकी महिलाओं को मोहरे की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं। यह तरीका पितृसत्ता जितनी ही पुरानी सोच पर टिका है कि सार्वजनिक जीवन में महिला कोई स्वतंत्र हस्ती नहीं होती, बल्कि एक ऐसी कमजोरी है, जिसका इस्तेमाल पुरुष के खिलाफ किया जा सकता है। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं को 'प्रॉक्सी टारगेट' किया जाता है। किसी अन्य के लिए उन्हें निशाने पर ले लिया जाता है। राजनीति में सक्रिय लोग सस्ती बयानबाजी करके अपना फायदा तो उठा लेते हैं, लेकिन लक्षित महिलाओं से उनकी मर्जी, सम्मान और मेहनत से अर्जित पहचान छीन लेते हैं। यह खुलेआम लैंगिक भेदभाव से आगे बढ़कर महिलाओं के प्रति ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.