पूर्णिया, नवम्बर 29 -- जलालगढ़, एक संवाददाता। कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ के परिसर में 15 ग्रामीण महिलाओं के चेहरे उस समय खिल उठे जब उन्हें उन्नत नस्ल की ब्लैक बंगाल बकरियां निःशुल्क सौंपी गईं। यह पहल अनुसूचित जाति और जनजाति उप योजना के तहत की गई जिसका मकसद महिलाओं को पशुपालन के माध्यम से स्थायी आय का रास्ता देना है। कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे वरीय वैज्ञानिक व प्रधान डॉ. के. एम. सिंह ने बताया कि ब्लैक बंगाल नस्ल सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद सहारा है। यह नस्ल तेजी से बढ़ती है, कम चारा में पल जाती है और मांस उत्पादन में उत्कृष्ट मानी जाती है। स्थानीय बाजारों में 800 से 1000 रुपये प्रति किलो तक कीमत मिलने से यह परिवारों को मजबूत आर्थिक आधार दे सकती है। ....वैज्ञानिक पद्धति से बकरी पालन की जानकारी: डोकरेल, जलालगढ...
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