महिलाओं की मजबूती के खुले कई रास्ते
नई दिल्ली, अगस्त 30 -- वसुंधरा राजे,पूर्व मुख्यमंत्री, राजस्थान साल 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने कुछ धार्मिक रस्में निभाई थीं, जैसा कि कोई भी आस्थावान भारतीय करता है। उस समय पवित्र कलश को ले जाने के लिए किसी पुरोहित या महात्मा को चुनना सबसे स्वाभाविक विकल्प होता, लेकिन परंपरा से हटकर मोदी जी ने रवीना जाधव को चुना, जो एक दलित लड़की थी और झुग्गी बस्ती में रहती थी। यह कोई बहुत प्रचलित या दिखावे के लिहाज से किया गया काम नहीं था, बल्कि सही काम था। नरेंद्र मोदी के लिए महिलाओं की गरिमा और सम्मान, उन्हें सशक्त बनाने की पहली सीढ़ी रही है। महिला सशक्तीकरण उनके लिए कोई दान या एहसान नहीं है। इसका मतलब है, किसी महिला को यह विश्वास दिलाना कि उसे अपनी जिंदगी और अपना भविष्य खुद तय करने का पूरा अधिकार है। इसका मतलब देश-समाज में...
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