वाराणसी, फरवरी 12 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि का पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सदियों पुरानी लोकपरंपराओं और आस्थाओं का जीवंत उत्सव है। इसी के तहत काशीपुराधिश्वर महादेव, माता गौरा को लाने प्रतीकात्मक स्वरूप में सिगोंल (दंड) के साथ राजसी ठाठ-बाट में नगर भ्रमण पर 15 फरवरी को निकलेंगे। शिवाजंलि के संयोजक संजिवरत्न मिश्र ने बताया इस वर्ष काशी की ऐतिहासिक शिव-बारात में काशीपुराधिश्वर का प्रतीकात्मक चल स्वरूप विशेष आकर्षण होगा। बाबा नवरत्नों से सुसज्जित राजसी छत्र और सिगोंल के साथ 11 प्रकार के काष्ठ (लकड़ी) से बने सिंहासन पर विराजेंगे। काशी में बाबा विश्वनाथ वर्ष में चार बार चल स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकलते हैं। महाशिवरात्रि का भ्रमण सबसे अलग और विशिष्ट माना जाता है। इस दिन वह माता गौरा क...
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