मुजफ्फरपुर, मार्च 31 -- सरैया, हिन्दुस्तान संवाददाता। विश्व शांति के लिए भगवान महावीर के पंचमहाव्रत- अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय एवं ब्रह्मचर्य- आज भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं। इनमें से किसी एक सिद्धांत को भी यदि हम अपने जीवन में आत्मसात कर लें, तो जीवन धन्य हो सकता है। मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। ये बातें मंगलवार को संग्रहालय निदेशालय, कला एवं सांस्कृतिक विभाग के अपर निदेशक विमल तिवारी ने कहीं। वे बासोकुंड स्थित प्राकृत जैनशास्त्र एवं अहिंसा शोध संस्थान के सभागार में महावीर जयंती के अवसर पर आयोजित स्व. जगदीश चंद्र माथुर स्मृति व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 'जियो और जीने दो' का संदेश आज के समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। कार्यक्रम में सरस्वती आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, बेगूसराय की सहायक आचार्य रीना जैन ...
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