महारास और रुक्मिणी विवाह प्रसंग से भावविभोर हुए श्रद्धालु
जौनपुर, मई 26 -- खुटहन, हिन्दुस्तान संवाद। त्रिकौलिया गांव में सर्वे भवन्तु सुखिन: की अवधारणा से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रारंभ से पहले मुख्य यजमान विजय बहादुर पुजारी ने पूजा अर्चन-पूजन के कथा का शुभारंभ किया गया। कथा व्यास पं. अखिलेश चंद्र मिश्र ने महारास प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि महारास स्त्री-पुरुष का मिलन नहीं, बल्कि जीव का परमात्मा के चरणों में प्रेमपूर्ण समर्पण है। उन्होंने बताया कि गोपियों के अनन्य प्रेम के आगे उद्धव जैसे ज्ञानी भी नतमस्तक हो गए थे। रुक्मिणी विवाह प्रसंग में कथा व्यास ने कहा कि रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं और लक्ष्मीपति केवल भगवान नारायण हैं। इसलिए लक्ष्मी के प्रति मातृभाव रखना ही कल्याणकारी है। यह भी पढ़ें- श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह का वर्णन शिवम उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत मर्मस्पर्शी धार्मिक गीतों ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.