महारास आत्मा और परमात्मा का दिव्य मिलन है, मात्र नृत्य नहीं
मेरठ, जून 6 -- मेरठ। बाबा औघड़नाथ मंदिर में नमामि राधे ट्रस्ट के तत्वावधान में हो रही श्री राधे पुराण कथा महोत्सव में शुक्रवार को कथावाचक ने श्रद्धालुओं को महारास का महत्व बताया। विधि विधान से कथा स्थल पर पूजन के बाद कथावाचक गोपाल कृष्ण भारद्वाज ने राधे पुराण के प्रसंगों का वर्णन करते हुए महारास की दिव्यता और आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला। कथावाचक ने कहा कि महारास मात्र नृत्य नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से अद्भुत और प्रेममय मिलन है। जब शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं से युक्त था और वृंदावन का वातावरण अत्यंत मनोहर था, तब भगवान श्रीकृष्ण ने मधुर वंशी बताई। उस दिव्य स्वर को सुनकर ब्रज की गोपियां सब कुछ त्यागकर श्रीकृष्ण के समीप पहुंच गईं। श्रीकृष्ण ने पहले गोपियों की परीक्षा लेते हुए उन्हें घर लौट जाने का उपदेश दिया,...
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