सीवान, जून 25 -- महाराजगंज, एक प्रतिनिधि। शहर के मध्य स्थित बोर्ड मिडिल स्कूल और शहीद स्मारक के समीप बसी मलिन बस्ती आज भी अपने इतिहास और मूल पहचान को तलाश रही है। विकास की चकाचौंध के बीच शहर के ठीक बीचों-बीच बसी यह बस्ती प्रशासनिक उपेक्षा की जीती-जागती मिसाल है। यहां करीब 47 परिवार रहते हैं, जिनकी कई पीढ़ियां इसी मिट्टी में खप गईं। हैरानी की बात यह है कि बस्ती में रहने वाले लोगों को भी आज यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि उनके पूर्वज कब और कहां से यहां आकर बसे थे। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि वे पिछले 60-70 वर्षों से इस बस्ती को इसी स्थान पर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का अनुमान है कि यह बस्ती सैकड़ों वर्ष पुरानी हो सकती है। यह भी पढ़ें- कबाड़ चुनकर महिलाएं और बच्चे करते हैं कमाईपूर्वज बस्ती के पुराने निवासियों के अनुसार बस्ती के पुराने निव...