मेरठ, अप्रैल 19 -- सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्तल ने कहा कि न्याय व्यवस्था को मजबूत किए बिना विकसित देश की कल्पना संभव नहीं है। वर्तमान भारतीय न्याय प्रणाली अभी भी आमजन की अपेक्षा सीमित वर्ग तक अधिक केंद्रित दिखाई देती है। उन्होंने ये विचार रविवार को मेरठ कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि देश की अदालतों में मुकदमों का अंबार लगा हुआ है और उनका निस्तारण आसान नहीं है। भारत की प्राचीन परंपरा को देखते हुए मीडिएशन यानी मध्यस्थता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। वादों का अदालतों के बाहर समझौते से निपटारा होने पर न्यायालयों का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है। परिवार न्यायालयों में इस प्रकार की व्यवस्था पहले से प्रभावी रूप में कार्य कर रही है। न्यायमूर्ति मित्तल ने महाभारत औ...
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