गया, अप्रैल 17 -- विश्व शांति और बौद्ध आस्था के सबसे प्रमुख केंद्रों में शामिल महाबोधि मंदिर ने बीते दो दशकों में वैश्विक पहचान के साथ बोधगया की तस्वीर भी बदल दी है। 27 जून 2002 को यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत सूची में शामिल किए जाने के बाद यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व प्रवाह शुरू हुआ, जिसने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। मंदिर का ऐतिहासिक आधार अत्यंत समृद्ध है। महाबोधि मंदिर के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और आधुनिक सुविधाओं के विकास को लेकर बीते एक दशक में कई महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, जिनसे इसकी भव्यता के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा भी मजबूत हुई है। यह भी पढ़ें- दो मंदिरों में भीषण चोरी, डेढ़ लाख की संपत्ति ले उड़े चोर नवंबर 2013 में थाईलैंड के श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर के शिखर को 289 किलोग्राम सोने की प्लेटों से ...