गया, फरवरी 11 -- पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने दर्शन में राजनीतिक रूप से नहीं बल्कि भारत को वैचारिक रूप से स्वतंत्र करने का प्रयास किया। उक्त वक्तव्य राजनीतिक एवं सामाजिक चिंतक हरेंद्र प्रताप ने दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के दीनदयाल उपाध्याय पीठ द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में दिया। हरेंद्र प्रताप ने कहा कि दीनदयाल जी के पिताजी का निधन काफी कम उम्र में हो गया था और उनका जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ था। लेकिन उनकी माता और परिवार के सहयोग से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और देश तथा दुनिया के समक्ष दर्शन के माध्यम से अपने बहुमूल्य विचार दिए जो राष्ट्र की प्रगति के लिए हमेशा प्रासंगिक रही है। उन्होंने चार्ट के माध्यम से मानव जीवन के अहम घटकों के साथ ''वसुधैव कुटुम्बकम'' की अवधारणा ...