शामली, मार्च 6 -- क्रांतिवीर श्री 108 मुनि प्रतीक सागर मुनिराज ने शामली से विहार करते हुए प्रवचन में कहा कि मनुष्य के जीवन में महान बनने का मूल आधार विनम्रता, श्रेष्ठ चरित्र और आत्मसुधार है। सच्ची महानता दिखावे से नहीं बल्कि कर्म और आचरण से प्राप्त होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक छोटे से बीज में अनंत संभावनाएं छिपी होती हैं, लेकिन वह कभी अपने सामर्थ्य का प्रदर्शन नहीं करता। वह चुपचाप मिट्टी में दबा रहता है और समय आने पर विशाल वृक्ष बनकर फल-फूल देता है। इसी प्रकार सच्चा महान व्यक्ति अपने गुणों का प्रदर्शन नहीं करता, बल्कि अपने कर्मों से अपनी महानता सिद्ध करता है। मुनि श्री ने कहा कि जीवन का एक महत्वपूर्ण नियम है कि जो अधिक बोलता है वह अक्सर कार्य कम करता है और जो वास्तव में कार्य करता है वह उसका प्रचार नहीं करता। आज के समय में ...