प्रयागराज, जनवरी 30 -- सर्जनपीठ प्रयागराज की ओर से महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर ऑनलाइन बौद्धिक परिसंवाद का आयोजन किया गया। हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संरक्षक विभूति मिश्र ने 'महात्मा गांधी : एक सार्वकालिक सत्य' विषयक परिसंवाद में कहा कि राष्ट्रपिता हर युग और कालखंड में प्रासंगिक रहे हैं और रहेंगे। क्योंकि वे अमिट सत्य हैं और उनका सिद्धांत व व्यवहार एकरूप हुआ करता था। अमेरिका से जुड़ी डॉ. नीलम जैन ने कहा कि गांधी शरीर नहीं बल्कि आत्मा हैं। वह एक ऐसी जीवनी हैं जिससे ऊर्जा मिलती है। जिस समय संचार का कोई माध्यम नहीं था तब भी उनकी आवाज पूरे विश्व में गूंजी थी। चीन से जुड़े डॉ. विवेकमणि त्रिपाठी ने कहा कि गांधीजी में कभी किसी पद-प्रतिष्ठा पाने के लिए रंचमात्र लोभ नहीं था। आयोजक पं. पृथ्वीनाथ पांडेय ने कहा कि समाज में जिस तरह से धर्म, जाति, वर्ग...
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