रतन कुमार श्रीवास्तव, मई 4 -- रतन कुमार श्रीवास्तव, पूर्व आईपीएस गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर प्रयागराज में जब करोड़ों कंठ से 'हर-हर गंगे' का उद्घोष उठता है, तो वह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं होता, वह भारत की आत्मा का स्पंदन होता है। महाकुंभ इस देश की उस अखंड आस्था का प्रतीक है, जो सदियों से बहती आ रही है। जो राजाओं के उत्थान-पतन से नहीं डिगी, जो आक्रांताओं की तलवारों से नहीं टूटी। पिछले महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या ने तमाम रिकॉर्ड तोड़ डाले। ऐसे आयोजन में मौनी अमावस्या की रात भगदड़ में कई लोगों ने प्रियजन खोए। उनका दर्द असली है, उनके आंसू असली हैं। इस दर्द को सरकार एवं न्यायपालिका, दोनों ने महसूस किया। न्याय की दुनिया में बार-बार एक बात दोहराई जाती है कि न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए। और वर्तमान...
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