बिल्ल्होर, जुलाई 24 -- घाटमपुर। राष्ट्रवादी उद्घोष के महाकवि भूषण की जन्मभूमि टिकवांपुर अपने ही देश में अनाथ है। तहसील क्षेत्र के सजेती थानांतर्गत बसा यह गांव कभी देश के पाठ्यक्रमों का हिस्सा हुआ करता था और यूपी, एमपी के साथ महाराष्ट्र तक इस नाम की गूंज थी। महाराष्ट्र में महाकवि भूषण को देवतुल्य माना जाता था। जिस कलम ने औरंगजेब के खिलाफ शिवाजी और छत्रसाल की तलवार को धार दी, उसी कलम की स्याही से सनी मिट्टी आज कूड़े और उपेक्षा में दबी पड़ी है। महाकविभूषण फाउंडेशन के अध्यक्ष रवींद्र कुमार मिश्र ''विपिन'' ने कहा कि कांग्रेस सरकारों के लंबे शासन में टिकवांपुर को जानबूझकर नक्शे से मिटाने की कोशिश हुई। बुंदेलखण्ड जैसी प्रकृति होने के बाद भी विकास नहीं हुआ। गांव से अस्पताल इतनी दूर है कि समय पर इलाज न मिलने के कारण अस्पताल पहुंचने से पहले सांसें ...