हरिद्वार, मार्च 28 -- भगवान दास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय की अखिल भारतीय शोध संगोष्ठी में वक्ताओं ने महर्षि दयानंद के शिक्षण दृष्टिकोण पर जोर दिया। इसके तहत गुरुकुल प्रणाली, ब्रह्मचर्य, नारी शिक्षा, तर्क आधारित अध्ययन और संस्कृत-हिंदी माध्यम से चरित्र निर्माण शामिल है। उन्होंने बताया कि महर्षि दयानंद ने 'वेदों की ओर लौटो' सिद्धांत से शिक्षा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ा। शनिवार को 'भारतीय ज्ञान परंपरा में महर्षि दयानंद का योगदान' पर हुई संगोष्ठी से देशभर के विवि-कॉलेजों के विद्वान और शोधार्थी जुड़े। इसकी अध्यक्षता प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रो. यशवीर सिंह ने की। मुख्य अतिथि स्वामी प्रणवानंद सरस्वती और विशिष्ट अतिथि गुरुकुल कांगड़ी विवि के कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार रहे। इस अवसर पर दिल्ली विवि के प्रो. ओमनाथ बिमली, आर्ष ज्योतिर्मठ गुरुक...
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