कानपुर, अगस्त 10 -- कानपुर। उलमा अहले सुन्नत मशावरती बोर्ड की बैठक सोमवार को जाजमऊ में हुई। बैठक में वंदे मातरम पर बनाए गए नए कानून को लेकर चर्चा हुई। उलमा ने कहा कि नया बिल संविधान की धारा 25 में दी गई मजहबी आजादी के खिलाफ है। हमारा संविधान सभी को अपने-अपने धर्म के हिसाब से जीने की आजादी देता है। उलमा ने घंटों चली चर्चा के बाद प्रस्ताव पास कर नए बिल को वापस लेने की मांग की। उपन्यास पर भी लंबे समय तक चर्चा हुई। बैठक में मौलाना हसीब अख्तर शाहिदी, शहर काजी मौलाना मुश्ताक अहमद मुशाहिदी, हाजी मोहम्मद सलीस, सैय्यद मोहम्मद अतहर, मौलाना गुलाम कादिर शाहिदी, मौलाना सैफुल हशमत, हाफिज अबरार अहमद, मौलाना मकबूल आलम निजामी, हाफिज शमीर आलम, सैय्यद मोहम्मद अयाज और मौलाना महमूदुल हसन आदि थे।

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