गया, अप्रैल 10 -- मगध विश्वविद्यालय के हिंदी एवं मगही विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को "भक्ति आंदोलन की सांस्कृतिक भूमिका" विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हिंदी भवन में किया गया। मुख्य वक्ता महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के सह आचार्य डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि भक्ति आंदोलन तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों की उपज था। जिसने भारतीय समाज में व्यापक सांस्कृतिक चेतना का संचार किया। उन्होंने विभिन्न विद्वानों के संदर्भों के माध्यम से बताया कि इस आंदोलन ने समाज में समावेशी सोच को बढ़ावा दिया। लेकिन इसके मूल्यांकन में समयानुकूल दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने संत परंपरा, सूफी प्रभाव और निर्गुण धारा की व्याख्या करते हुए कहा कि हिन्दी समाज को अपने इतिहास के पुराने मानदंडों को बदलने की आवश्यकता है। ...
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