बलिया, मार्च 24 -- नगरा, हिन्दुस्तान संवाद। विजय कौशिक महाराज ने श्रीराम-सीता के दिव्य विवाह प्रसंग में बताया कि यह विवाह केवल दो लोगों का मिलन नहीं बल्कि आदर्श, मर्यादा और संस्कारों का प्रतीक है। बताया कि महाराज जनक की ओर से आयोजित स्वयंबर में पहुंचे राजाओं के अहंकार का मर्दन और श्रीराम के विनयपूर्ण वचन से परशुराम का क्रोध शांत होना यह सभी मानव जीवन के लिए अनुकरणीय संदेश है।वासंतिक नवरात्र पर नगरा के पुरानी दुर्गा मंदिर परिसर में चल रहे श्रीराम जन्म महोत्सव में चल रहे श्रीराम कथा के छठवें दिन सोमवार की शाम प्रवचन करते हुए कौशिक महाराज ने श्रीराम-सीता के साथ ही लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी तथा शत्रुध्न-श्रुतिकीर्ति के विवाह प्रसंग का वर्णनकर सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के दौरान बीच-बीच में पारम्परिक मैथिली विवाह गीतों पर ...
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