हरिद्वार, अप्रैल 6 -- मृत्युंजय मिशन, नंदीपुरम (गैंडीखाता) में आयोजित 27वीं मर्म चिकित्सा कार्यशाला के तहत पांच दिवसीय प्रशिक्षण का सोमवार से किया गया। कार्यशाला में देशभर से आए 38 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. सुनील कुमार जोशी ने बताया कि उन्होंने मर्म विज्ञान के क्षेत्र में 38 वर्षों से शोध करते हुए हजारों रोगियों का गैर-आक्रामक पद्धतियों से उपचार किया है। उन्होंने कहा कि शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को सक्रिय करने वाली प्रभावी विधि बताया है। मर्म चिकित्सा, प्राचीन आयुर्वेद में वर्णित एक पद्धति है, जिसमें शरीर के विशिष्ट बिंदुओं-मर्म बिंदुओं-को उत्तेजित कर ऊर्जा संचार बढ़ाने, तनाव कम करने और उपचार प्रक्रिया को सक्रिय करने का कार्य किया जाता है। ये बिंदु मांसपेशियों, नसों, हड्ड...
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