कुशीनगर, मार्च 14 -- कुशीनगर। जिले में ऐसे निजी अस्पतालों की भरमार सी हो गई है, जहां तय गाइडलाइन को पूरा न करने के बावजूद उनका संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। ऐसे अस्पतालों में अस्पताल संचालकों या फिर डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मरीजों की जान चली जा रही है। अभी जो मामला सुर्खियों में छाया हुआ है, वह कोटवा का खुशी हॉस्पिटल है। आरोप है कि इस अस्पताल के संचालक ने ही गर्भवती महिला का प्रसव कराया, जिससे जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। तब से वह फरार है।स्वास्थ्य विभाग की मानी जाए तो उनके अभिलेख रिकॉर्ड में एक साल के लिए पंजीकृत अस्पतालों की संख्या 1092 है, जिसमें क्लीनिक, ओपीडी, पैथालॉजी, एक्सरे, नर्सिंगहोम और मेडिकल स्टोर जैसी सुविधाएं भी हैं। पांच साल के लिए जिन अस्पतालों का पंजीकरण है, उनकी संख्या 249 है। पांच साल के लिए पंजीकरण उन्हीं अस्पतालों का ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.