मुख्य संवाददाता, दिसम्बर 18 -- जिस बेटे के लौटने की उम्मीद में मां की आंखें बरसों तक दरवाजे पर टिकी रहीं और अंततः उसी इंतजार में वह दुनिया से चली गई, वही बेटा 27 साल बाद जीवित हालत में परिवार के सामने खड़ा हो गया। सुनने में यह फिल्मी कहानी लगती है, लेकिन बरेली के 70 वर्षीय रमेश की यह दास्तान हकीकत है। मानसिक बीमारी के कारण 27 वर्ष पहले परिजनों से बिछड़ गए रमेश को परिवार से मिलाने में सफलता मिल गई है। यह संभव हो पाया मनोसमर्पण सेवा संस्थान और इसके फाउंडर व साइकोलॉजिस्ट शैलेश शर्मा के प्रयास से। परिजन रमेश को वर्षों पहले मृत मान चुके थे और उसका अंतिम संस्कार तक कर चुके थे। रमेश को 6 फरवरी 2025 को मुंबई के एकतानगर रेलवे कॉलोनी में भटकते हुए पुलिस ने बरामद किया था। भायखला थाना पुलिस ने उन्हें ग्रेस फाउंडेशन भेजा, जहां से श्रद्धा रिहैबिलिटेशन ...