नई दिल्ली, मई 3 -- पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से ही अपने तीखे तेवरों और चुनावी हिंसा के लिए जानी जाती रही है। साल 2026 का विधानसभा चुनाव भी इससे अलग नहीं है। 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में हुए मतदान के बाद अब सबकी नजरें चुनावी नतीजों पर टिकी हैं। लेकिन इस बार का चुनाव केवल तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सीधी जंग भर नहीं है। इसके पीछे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और राज्य की बदलती जनसांख्यिकी के गहरे राजनीतिक मायने छिपे हुए हैं।आइए 10 बिंदुओं में समझते है भाजपा-टीमसी की लड़ाई1. वोटर लिस्ट का सबसे बड़ा विवाद इस चुनाव का सबसे बड़ा और विवादित मुद्दा एसआईआर रहा है। चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में एक बहुत बड़ा बदलाव किया। इस प्रक्रिया के तहत लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लि...
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