मन का भाव ही सबसे बड़ा तीर्थ
आगरा, जून 14 -- विश्व सनातन ट्रस्ट की ओर से कमला नगर स्थित सुभाष नगर चौराहे पर चल रही शिव पुराण कथा मे तीसरे दिन कुबेर की महिमा, शंकरजी की कुबेर की मित्रता, सती चरित्र व पार्वती जन्मोत्सव की कथा का वर्णन किया गया।
कुबेर की महिमा व्यास पीठासीन कार्ष्णि मयंक उपाध्याय महाराज ने कहा कि मन का भाव ही सबसे बड़ा तीर्थ है। भगवान शिव की आराधना के लिए कोई विशेष समय नहीं होता। जब चाहो, तब शिव का स्मरण करो, शिव सदैव हृदय में शांत रूप से विराजते हैं। कुबेर की महिमा बताते हुए कार्ष्णि मयंक उपाध्याय ने कहा कि धन का उपयोग सदैव धर्म, सेवा व लोककल्याण को होना चाहिए। अहंकार से धन का नाश होता है, जबकि विनम्रता से उसकी शोभा बढ़ती है।
सती चरित्र सती चरित्र के प्रसंग में बताया कि सती चरित्र पतिव्रता धर्म, आत्मसम्मान और भगवान के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक माना...
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