मनुष्य को भक्ति हमेशा विकार रहित होकर करनी चाहिए : देवराहा शिवनाथ
आरा, जून 24 -- आरा, निज प्रतिनिधि। परमपूज्य त्रिकालदर्शी, परमसिद्ध, विदेह संत श्री देवराहा शिवनाथ दासजी महाराज के सानिध्य में आरा मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रामापुर सनदिया में संकीर्तन का आयोजन किया गया। यह भी पढ़ें- मनुष्य को भक्ति हमेशा विकार रहित होकर करनी चाहिए : देवराहा शिवनाथकार्यक्रम का उद्देश्य संकीर्तन के पूर्व श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संत श्री ने कहा कि सूखी हुई लकड़ी जैसे आग के संपर्क में आने से तुरंत ही प्रज्ज्वलित हो जाती है और भीगी हुई लकड़ी आग के संपर्क में आने पर भी प्रज्ज्वलित नहीं होती है, वैसे ही भक्त भी दो तरह के होते हैं। पहला भक्त षड्विकार (काम, क्रोध, मद, मोह, माया और लोभ) से रहित और दूसरा षड्विकार युक्त होते हैं।संत की शिक्षा संत श्री ने आगे कहा कि जैसे सूखी हुई लकड़ी में जब घी का लेप लगाया जाता है और घी का लेप...
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