चंदौली, अप्रैल 13 -- नियामताबाद, हिन्दुस्तान संवाद। विकासखंड के ख्यालगढ़ में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ में तीसरे दिन की कथा में पंच शुद्धि पर चर्चा की गई। कथावाचक अखिलानंद ने कहा कि धर्म सम्राट परीक्षित के पांच शुद्ध थे। जिसमें मातृ शुद्धि, पितृ शुद्धि, वंश शुद्धि, अन्न शुद्धि, जल शुद्धि शामिल हैं। कहा कि माता-पिता के संस्कार से ही पुत्र में संस्कार आता है। जो संस्कारवान हैं उनके ऊपर ही भगवान की कृपा होती है। क्योंकि माता-पिता ही पुत्र के प्रथम गुरु होते हैं। माता-पिता के द्वारा दिए गए प्रथम ज्ञान के फलस्वरुप ही संतान में संस्कार आता है। जिससे उक्त बालक अथवा जीव का जीवन मर्यादित होता है। प्रत्येक माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि सबसे पहले हम अपने जीवन को मर्यादित रखें। ताकि वैसे ही पुत्र का जीवन भी मर्यादित हो सके।ईश्व...