मेरठ, फरवरी 28 -- हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के चौथे दिन शुक्रवार को सर्वप्रथम मुख्य वेदी के अभिषेक तथा शांतिधारा की गई। भगवान की शांतिधारा अनंतवीर जैन,, मंजू जैन, शैलेष जैन, गर्व, श्रुति जैन ने की। शांतिधारा के पश्चात पंचमेरू नंदीश्वरद्वीप जिनालय के साथ भगवान शांतिनाथ की पूजा-अर्चना की गई। तदोपरान्त श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान करते हुए क्रोध, मान, माया, लोभ आदि पापों को दूर करने के लिए मांडले पर 128 अर्घ्य समर्पित किए गए। आचार्य विमर्श सागर जी महाराज ने कहा कि आत्मा का स्वरूप सिद्धत अवस्था को प्राप्त करना है। आज व्यक्ति अपने हित को छोड़कर दूसरो के अहित में लगा हुआ है। वह अपने दुख से दुखी न होकर दूसरों के सुख से दुखी है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। व्यक्ति को अपने अवगुण देखने चाहिए और ...