समस्तीपुर, मार्च 30 -- रोसड़ा,। कहो गर्व से खुद को बिहारी, हम भी प्रतिभाधारी हैं, "रौद्र सौम्य बन जाती नारी, क्या-क्या रूप दिखाती नारी और बेटिक सांठक समान जा रहल अइछ पंक्तियों का सस्वर पाठ जब क्रमशः कवि शंकर सिंह सुमन, अनिरुद्ध झा दिवाकर व अमित मिश्रा ने किया तो पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अवसर था 'साहित्य संगम' के बैनर तले आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी का, जहां कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन, समाज और संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध गजलकार अवधेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि साहित्य मनुष्य की संवेदनाओं का दर्पण होता है और काव्य समाज के यथार्थ को शब्दों में जीवंत करता है। वहीं शिखर संरक्षक सह मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य प्रो. शिव शंकर प्रसाद सिंह ने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का कार...
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