हरिद्वार, मार्च 19 -- चैत्र नवरात्र पर मनसा देवी मंदिर से नई पहल होने जा रही है, जिसका उद्देश्य प्राचीन परंपराओं को पुनर्जीवित करने के साथ हर वर्ग की सहभागिता को बढ़ाना है। गुरुवार को मनसा देवी मंदिर पहुंचे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने मीडिया से वार्ता की। उन्होंने बताया कि पुराने समय में मंदिरों में पूजा-अर्चना के दौरान ढोला-ढोली, दमाऊ, शहनाई, नगाड़े और तुरही जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता था। इनकी ध्वनि से ही पूजा और आरती का पवित्र वातावरण बनता था। डॉ. रविंद्रपुरी ने कहा कि आधुनिक समय में यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म हो गई थी, लेकिन अब इसे पुनः स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बड़े ढोले की थाप को देव जागरण का प्रतीक माना जाता है और इससे जनकल्याण की भावना जुड़ी...