वाराणसी, अप्रैल 9 -- प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में दंड प्रक्रिया पर कहा है कि एक ही मामले में बार-बार अलग-अलग आधारों पर याचिका दाखिल करना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इसे 'फोरम शॉपिंग' कहा जाता है। कोर्ट ने कहा कि संबंधित आरोपी-प्रतिवादियों के पास जो आधार/दलील पहले से उपलब्ध थे, उसे उन्होंने अपनी पहली याचिका में नहीं उठाया। ऐसे में बाद में उसी आधार पर दूसरी याचिका दाखिल करना स्वीकार्य नहीं है। वाराणसी के राम दुलार सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति समित गोपाल ने कहा कि एक बार किसी मुद्दे को छोड़ दिया गया हो, तो उसे बाद में फिर से उठाना कानूनन उचित नहीं माना जा सकता। याची ने अपने खिलाफ दर्ज़ धोखाधड़ी के मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले विजय कुमार घ...