प्रयागराज, अक्टूबर 16 -- लाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा कि भूमि अधिग्रहण मामलों को मध्यस्थता और सुलह से निपटाया जाना चाहिए। मुआजवा बढ़ाने की मांग के लिए मध्यस्थता और सुलह अधिनियम के तहत पर्याप्त और प्रभावी वैधानिक वैकल्पिक उपाय मौजूद है तो पहले प्रकरण को वहां ले जाना चाहिए। हाईकोर्ट में सीधे याचिका दाखिल नहीं करना चाहिए। इसी के साथ कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने रामशंकर यादव और एक अन्य की याचिका पर दिया है। हाथरस निवासी याचियों की जमीन इकबालपुर के गौसगंज गांव में है। राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए याचियों की जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया। इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम क...
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