नई दिल्ली, अगस्त 30 -- आलोक जोशी,वरिष्ठ पत्रकार सन् 1974 में आई सुपरहिट फिल्म रोटी कपड़ा और मकान का एक गाना-और बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गई, शायद फिल्म से भी ज्यादा हिट हुआ। इसकी यह पंक्ति तब से आज तक किसी न किसी रूप में बार-बार सामने आती ही रहती है। इसकी सबसे बड़ी वजह शायद यही है कि महंगाई आम मध्यवर्गीय इंसान की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। सबसे ज्यादा चुभने वाली महंगाई होती है आटे-दाल की, पर जब राजनीति हो, तो सबसे ज्यादा बात होती है चीनी और प्याज की। इस वक्त यही दोनों सुर्खियों में दिख रहे हैं। हालांकि, किस्सा पेट्रोल-डीजल से होते हुए सोने-चांदी और तेल तक चला जाता है। रिजर्व बैंक की नजर से देखें, तो खुदरा महंगाई दर दो से छह प्रतिशत के बीच रहने का मतलब है कि कीमतें बढ़ने की रफ्तार काबू में है या बर्दाश्त के लायक है, मगर यह आंकड़ा पूरी कह...